केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में रामगढ़ की कुमार धर्मशाला में लोक राज संगठन की ओर से किसान सभा का आयोजन किया गया ।इसमें दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलित 35 किसान शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई तत्पश्चात किसानों की दशा और दिशा पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया ।
इसमें सभी वक्ताओं ने ब्रिटिश काल से लेकर तथाकथित आजादी के बाद भी किसानों की दशा सुधारने के लिए कोई पर्यतन किसी भी प्रकार की सरकारी आ गई हो नहीं किया गया। अनेक प्रकार की समितियां गठित की गई परंतु किसान के नाम पर कारपोरेट घरानों की तिजोरी भरने का काम हुआ क्योंकि राज्य सत्ता में बैठे लोग इस सरमायेदारी व्यवस्था की ही सेवा करते रहे। आम लोगों को राज्य सत्ता में कोई स्थान नहीं था विचार गोष्ठी में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा की गई अपील के आधार पर पूरे भारत में 1 दिन का उपवास रखा गया है। और संघर्ष समिति ने यह भी अपील की है की 27 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात के अवसर पर विरोध स्वरूप पूरे समय काली और थाली बजाई जाए ।
गोष्टी में इस बात का समर्थन किया गया और विचार गोष्ठी के समापन के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 3 किसान विरोधी कानूनों तथा संशोधित बिजली कानून का डटकर विरोध किया जाए और तात्कालिक मांगों के संघर्षों में लोगों को ज्यादा से ज्यादा भाग लेने की अपील की जाए। इन संघर्षों में जनमानस में वर्ग चेतना विकसित करने की कोशिश हो। जिससे वर्ग संघर्ष की धार पेनी हो कर इस सरमायेदारी व्यवस्था को नेस्तनाबूदकिया जा सके ।लोक राज संगठन 27 तारीख के बाद दिल्ली सिद्धू बॉर्डर पर जाने का भी निर्णय लिया।
विचार गोष्ठी में लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा डॉक्टर कृष्ण नोखवाल मनीराम लकेसर ओम सागर कामरेड ओम साहू पूर्व सरपंच शैलेंद्र कुमार दयाराम ढील खेताराम सिंगाठिया राममूर्ति स्वामी नरेश सागर आदि ने अपने विचार रखे धन्यवाद!

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