5 जुलाई, 2015 को नई दिल्ली में स्थित जसौला गांव के निवासी लोक राज संगठन कि पहल पर स्थानीय समस्याओं के समाधान लिए जनसभा में एकजुट हुये। इस सभा में लोक राज संगठन के सस्दय और स्थानीय गांव के निवासी, पुरूष और महिला काफी संख्या में शामिल हुये।

सभा गृह में निर्धारित समय से पहले ही लोग का आना शुरू हो गये थे। जिसके स्वरूप सभागृह खचा-खच भर गया।

सभा कि शुरूआत करते हुये छाया जी ने बताया कि जसौला गांव वर्षों पुराना है लेकिन आज भी यहां पर स्थानीय लोगो को पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। यहां पीने के पानी को खरीदना पड़ता है जिसकी शु़़द्धता का मापदण्ड नहीं है। हमें अपने अधिकार को हासिल करने के लिए एकजुट होना होगा। जैसे हमने पहले, खासकर महिलाओं को लेकर नाले, साफ-सफाई और सार्वजनिक शौचालय इत्यादि मांगों को लेकर संघर्ष किया है।

उन्होने बताया कि लोक राज संगठन ने दिल्ली की अलग-अलग कालोनियों जैसे संगम विहार, संजय कालोनी, इन्दिरा कैम्प, शशी गार्डन, और जसौला गांव इत्यादि स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य मंत्री अरविंद केजरिवाल को मांग पत्र दिया है। आज हमें इस संदर्भ में आगे की लड़ाई को तय करना है।

लोक राज समिति खादर विस्तार कि सस्दय रेणू ने अपने अधिकारों के संघर्ष के अनुभव से बताया कि लोक राज संगठन ने दिल्ली कि अलग-अलग कालोनियों में लोगों की लोक राज समिति का निर्माण किया है, जो स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए काम करती है। हमने ट्राजिस्ट कैंप के तोड़े जाने के खिलाफ़ संघर्ष किया, हमने संजय कालोनी में शौचालय के निर्माण के लिये संघर्ष किया और जीते भी है।

उन्होंने आगे बोलते हुये कहा कि हमने दिल्ली में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों कि सत्ता देखी है। जिसमें कभी कांग्रेस पार्टी, कभी भाजपा या अन्य पार्टियों सत्ता में रही है। परन्तु लोगों को सभ्य समाज मे रहने लायक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा है। हमे अपने अधिकारों के लिए खुद खड़ा होना पड़ेगा। हमें राजनीतिक पार्टियों के बटवारे की राजनीति से ऊपर उठकर अपने अधिकारों कि हिफ़ाज़त के लिए संघर्ष तेज़ करना पड़ेगा।

हमें अपने अधिकारों के संघर्ष के साथ-साथ हमें एक ऐसी समाज को बनाने कि दिशा में संघर्ष करना पड़ेगा। जहां राजनीतिक पार्टियां लोगों को राज्य सत्ता कि बागडोर संभालने के काबिल बनाती है। जहां लोगों को चयन करने, यानि चुनने और चुने हुए जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार लोगों के हाथों में हो।

सभा को संबोधित करते हुये स्थानीय नौजवान रविन्द्र ने कहां कि जसौला गांव में पीने का पानी कि मुख्य समस्या है, हमारे गांव के बच्चों को जब उन्हें पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिये उस समय वह दूर-दराज से पानी की तलास में जाना पड़ता है। हमें खुद अपनी लड़ाई करनी पड़ेगी। हमें अपने विधायक से मिलना चाहिये और हमे मांग करना पड़ेगा कि पानी कि समस्या को तुरन्त दूर किया जाये।

इसी क्रमः में स्थानीय महिला माया जी ने कहा कि हमें सिर्फ समस्या पर ध्यान देना चाहिये। हमें अपनी काॅलोनी में पीने के पानी के लिये संघर्ष करना चाहिये। हमें अपने एरिया में 25-25 औरतों को ग्रुप बनाना चाहिये और हमें पत्र के माध्यम से सरकार को अवगत करना चाहिये।

लोकराज संगठन से लोकेष ने कहा कि मानव होने के नाते सबका बुनियादी अधिकार होता है। पानी सब लोगों का बुनियादी अधिकार है। लोकराज समिति को बनाये और उसके तहत पीने के पानी लिये संघर्ष करे। यह सरकार पानी के नाम से मुनाफा बनाती है और वह टैंकर से पानी देते है। जबकि उतने ही पैसे पर हमेषा के लिये पानी के कनेक्षन मिल सकता है मकान मालिक और किरायेदार यह सबका अधिकार है। लेकिन सरकार इनको बांट कर रखना चाहती है। हमको इस सोच से उपर उठकर हमें अपने अधिकार के लिये लोकराज समिति के तहत सूचना के अधिकार के तहत त्ज्प् पानी के लिये सरकार का क्या प्लान है। इसके तहत हम धरना प्रदर्षन करेंगे तब सरकार सुनेगी।

मंच संचालन करते हुये पूनम ने लोक राज समिति जसौला विहार कि स्थापना के लिये लोगो से अपना नाम देने का आग्रह किया। जिसमे कई लोगों ने आगे बढ़कर अपना नाम दिया और उन्होने स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिये अपनी आवाज़ बुलंद की।

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