राजस्थान के हनुमानगढ़ जिला में, सेम पीड़ित किसान संगठन की अगुवाई में, सेम समस्या के स्थाई समाधान की मांग को लेकर किसान चक 13 एस.पी.डी. के पास सेमनाले की सबड्रेन पर 178 दिन से धरना दे रहे हैं।

नोटः नहर के किनारे की भूमि में सीलन की वजह से जमीन के नीचे के नमक के ऊपर आ जाने से, वह दलदली भूमि कृषि के काम के लायक नहीं रहती है। इस भूमि को सेम कहा जाता है।

इस धरने को अपना समर्थन प्रकट करते हुये, लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष माननीय हनुमान प्रसाद शर्मा, सहित एक प्रतिनिधि मंडल धरना स्थल पर गया। उन्होंने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिये चल रहे इस संघर्ष को तेज करने का आह्वान दिया।

अपनी तीन सूत्री मांगों – सेम समस्या की जिम्मेदारी एक विभाग को सौंपे जाने, बडोपल ढ़ाब में लिफ्ट लगाकर सेम के पानी को घग्घर डिप्रेशन में नियमित रूप से डाले जाने तथा सेम पीड़ित किसानों को जब तक सेम समस्या का हल न हो तब तक बीस हजार रुपये प्रति बीघा मुआवजा दिये जाने को लेकर किसान संघर्ष कर रहे हैं।

सेम की वजह से हजारों एकड़ भूमि के बर्बाद होने से करीब दो लाख लोगों की रोजी-रोटी संकट में पड़ गयी है। सेम पीड़ितों ने बार-बार संघर्ष किये परन्तु जो भी सरकार आई आश्वासन देकर आन्दोलन समाप्त करवाकर किसानों को धोखा दिया है। इस बार सेम पीड़ित किसानों ने संगठित होकर तीनों मांगों के पूरा न होने तक आन्दोलन चलाने का निर्णय लिया है।

इस सेम समस्या के चलते रावतसर, पीलीबंगा व सूरतगढ़ तहसीलों का विकास रुक गया है। 178 दिनों से धरना चल रहा है परन्तु सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगी, जबकि किसान परिवार से जुड़े जल संसाधन मंत्री इसी जिले के हैं। अभी तक सरकार के किसी मन्त्री व आला अफसर ने पीड़ित किसानों से वार्ता नहीं की। इससे नाराज किसानों ने आन्दोलन को तेज़ करने का निर्णय लेकर तहसील मुख्यालयों को बंद करवाने की अपील की। इस इलाके के किसानों, मजदूरों, व्यापारियों व सभी वर्गों के समर्थन से यह बंद सफल रहा। उसके बाद 31 मार्च को सेम पीड़ित किसान संगठन की अपील पर रावतसर का ऐतिहासिक बंद सफल रहा। बंद के दौरान बाज़ार में हजारों किसानों ने जुलूस निकाला और राजस्थान सरकार के जमकर विरुद्ध नारे लगाये तथा दोपहर बाद धान मंडी में विशाल जन सभा हुई।

सभा में सभी वक्ताओं ने चालीस साल पुरानी इस समस्या का समाधान नहीं करने पर सरकार को जमकर कोसा। वक्ताओं ने बताया कि प्रदेश में अलग-अलग पार्टियों की सरकार रही परन्तु किसी ने भी सेम की समस्या को गम्भीरता से नहीं लिया। करोड़ों रुपयों की परियोजनाएं बनाई परन्तु सबकी सब भ्रष्टाचार व लापरवाही के कारण फ्लाॅप रहीं। जिला कलेक्टर कभी किसानों को सेम वाली भूमि में बांस की खेती करने की सलाह देते हैं जबकि सेम वाली जमीन में बांस उग ही नहीं सकता। साथ ही कभी सेम निवारण के लिये 2400 तो कभी 2800 करोड़ रुपये का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजने की बात कहकर किसानों को गुमराह करते हैं। जबकि कौन सा प्रस्ताव भेजा है न तो दिखाते हैं और न ही उसकी प्रति देते हैं।

सेम पीड़ित किसानों ने चुनौती देते हुए यह दावा किया कि किसानों की राय ली जाये न कि इंजीनियरों की तथा यह भी दावा किया कि 2400 और 2800 करोड़ रुपये नहीं, हमें 45-50 करोड़ रुपये दे दो, हम सेम समस्या को हल कर देंगे। परन्तु सरकार सेम समस्या को हल करना ही नहीं चाहती।

सभा को किसान संघ के प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण सहारण, पूर्व सांसद भरतराम मेघवाल, पूर्व विधायक धर्मेंद्रमोची, लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा, हनुमानगढ़ पंचायत समीति के प्रधान जयदेव भिढ़ासरा, पूर्व विधायक आदराम, किसान संघ के तहसील अध्यक्ष प्रताप सिंह सुंडा, अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष ओम जांगू, सेम पीड़ित किसान संगठन के अध्यक्ष सुभाचन्द्र, इंजीनियर अमीलाल, पालिका अध्यक्ष ताराचंद डालिया, पीलीबंगा पंचायत समिति प्रधान पेमराज जाखड़, एस.एफ.आई के तहसील अध्यक्ष महानंद खोेखर, निजी शिक्षण संस्था संघ के तहसील अध्यक्ष सीताराम पारीक, जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र पचार, व्यापार मंडल अध्यक्ष आत्माराम गोदारा, पेस्टीसाइट यूनियन अध्यक्ष वेदप्रकाश सहारण, जोतराम गोदारा, सरपंच रमेश कुमार, धन्नाराम गोदारा, सेम पीड़ित किसान संगठन के मंत्री संजय गोदारा, किसान नेता हंसराज शर्मा जिलाध्यक्ष लोक राज संगठन, साहबराम पूनिया, ताराचंद विनोद धारनियां, नन्दलाल, प्रेमराज बेनीवाल आदि ने संबोधित किया।

लोक राज संगठन यह मांग करता है कि सेम पीड़ित किसानों की समस्याओं को तुरंत हल किया जाये। लोक राज संगठन किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करने को वचनबद्ध है।

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