23-24 फरवरी, 2015 को देशभर से आये हजारों-हजारों किसानों, आदिवासियों और कृषि मजदूरों ने भारतीय जनता पार्टी नीत राजग सरकार द्वारा जारी किये गये भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद की।

दो दिन चली इस रैली में, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, बंगाल, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड तथा कई अन्य स्थानों से किसानों, आदिवासियों और भूमि पर जीविकोपार्जन करने वाले किसानों ने भाग लिया। इसमें महिलाओं ने बड़े उत्साह से बड़ी संख्या में भाग लिया।

“भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को रद्द करो!”, “किसान-विरोधी राजग सरकार मुर्दाबाद!”, “विकास के नाम पर किसानों को भूमि से बेदखल करना बंद करो!”, “बड़े पूंजीपतियों की सेवा के लिए किसानों की पीठ पर छूरा भोंकना बंद करो!” – ये नारे इन दो दिनों की रैली में गूंज रहे थे।

रैली में “हम हैं इसके मालिक, हम हैं हिन्दोस्तान, मजदूर, किसान, औरत और जवान!”, “किसानों के शोषण का एक इलाज – लोक राज लोक राज!”, आदि नारे वाले बैनर भी लगे हुए थे।

दिल्ली का संसद मार्ग और जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों से भरा पड़ा था।

मंच से वक्ताओं ने एक आवाज में भूमि अधिग्रहण के अध्यादेश की कड़ी निंदा की और इसे वापस लेने की मांग की।

वक्ताओं ने कहा कि भाजपा नीत केन्द्र सरकार ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लागू किया है ताकि देशी-विदेशी बड़े पूंजीपतियों के मुनाफों को बढ़ाने, जनता की भूमि और संसाधनों की लूट-खसौट को और आसान करने के कार्यक्रम बढ़ावा दिया जा सके।

वक्ताओं ने कहा कि भूतपूर्व कांग्रेस नीत संप्रग सरकार तथा विभिन्न पार्टियों की राज्य सरकारों ने उपनिवेशवादी भूमि अधिग्रहण कानून 1894 के ज़रिये ‘सार्वजनिक हित’ की आड़ में बड़े पैमाने पर किसानों को उनकी भूमि से बेदखल किया था। इसके खिलाफ़ किसानों, आदिवासियों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने वर्षों जी-जान से संघर्ष किया और आंदोलन चलाये। जिसकी वजह से संप्रग सरकार को मजबूरन अंग्रेजों के बनाये गये भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन लाना पड़ा। इस संशोधन से इजारेदार उद्योगपतियों को भूमि पाने में जो बाधायें आ रही थी उन्हें दूर करने के लिये राजग सरकार अध्यादेश लायी थी।

लोक राज संगठन के दिल्ली सचिव, बिरजू नायक ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने तथा अन्य वक्ताओं ने कहा कि भूमि और प्राकृतिक संपत्ति के विकास का मकसद समाज के हरेक मेहनतकश के जीवन-स्तर में उन्नति लाना तथा भावी पीढि़यों के लिए खुशहाली व सुरक्षित जीवन दिलाना होना चाहिए न कि इज़ारेदार उद्योगपतियों के मुनाफे बढ़ाना।

अखिल भारतीय किसान सभा, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एन.ए.पी.एम.), लोक राज संगठन, अखिल भारतीय वन श्रमजीवी मंच, राष्ट्रीय किसान संघर्ष समिति, संयुक्त किसान संघर्ष समिति, इंसाफ, दिल्ली समर्थक समूह, घर बचाओ-घर बनाओ आंदोलन, नर्मदा बचाओ आंदोलन, किसान मंच, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, आदि अनेक संगठनों ने इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया।

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