minimum-wages-2.jpgदिल्ली में मजदूर एकता कमेटी द्वारा न्यूनतम वेतन को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में सैकड़ों मजदूर शामिल हो रहे हैं। यह अभियान, दक्षिण दिल्ली के ओखला मेट्रो स्टेशन, संजय कालोनी, ओखला फेस-2, तेहखंड गांव, ओखला की रेलवे साइडिंग तथा पूर्वी दिल्ली के शशी गार्डन, मदरपुर खादर विस्तार तथा पुनर्वास कालोनी आदि जगहों पर सफलतापूर्वक चलाया गया।

इस अभियान में लोक राज संगठन के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और ओखला मजदूर एसोसियेशन बनाने की पहल की और इसके लिये सैकड़ों मजदूरों को सदस्य बनाया।

अभियान के दौरान एक प्रस्तुति दिखाई गई जिसमें बहुत ही साफ तौर से समझाया गया कि न्यूनतम वेतन अधिनियम जो कि 1948 में पास किया गया था तथा 15वें श्रम सम्मेलन (इंडियन लेबर कांफ्रेंस) जो 1957 में हुआ था। उन दोनों के अनुसार मजदूरों के लिये एक न्यूनतम वेतन तय किया जाना चाहिये, जिसके तहत किसी भी मजदूर को जीवन निर्वाह करने योग्य न्यूनतम वेतन दिया जाना अनिवार्य है। न्यूनतम वेतन के निर्धारण में रोटी, कपड़ा, मकान और ईंधन की पूर्ति के लिये मूल्य शामिल किया जाना चाहिये है। इसके अलावा 1991 में सुप्रीम कोर्ट ने एक मुकदमें की सुनावाई के दौरान यह फैसला सुनाया कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, त्योहार, शादी-विवाह, इत्यादि के लिये कुल तय वेतन में 25 प्रतिशत और शामिल किया जाना चाहिये।

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प्रस्तुति में तुलनात्कम समीक्षा की गई और बताया गया कि सरकारी मापदंड के अनुसार एक मजदूर व्यक्ति को जीने के लिये 2700 कैलोरी चाहिये, ताकि वह अगले दिन फिर से काम पर आने योग्य हो। एक मजदूर परिवार जिसमें एक मजदूर, उसकी पत्नि और उसके दो बच्चे शामिल हों, को 3 इकाई माना गया है।

प्रस्तुति में बताया गया कि वर्तमान में खाद्य वस्तुओं के सरकारी मूल्य के अनुसार, जो कीमत इस समय दिल्ली में है, उसके अनुसार कुल खर्च का योग और आवासीय योजना के तहत मकान का किराया, कपड़ा तथा सुप्रीम कोर्ट के अनुसार तय किया गया शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन आदि पर होने वाले खर्च को भी शामिल किया गया है। उन सभी मापदंडों के अनुसार वर्तमान में एक परिवार को दिल्ली शहर में जीवन निर्वाह करने के लिये न्यूनतम वेतन – अकुषल = 13584 रुपये, अर्ध-कुषल/आठवीं पास = 14942 रुपये, कुषल/दसवीं पास = 16436 रुपये, कुषल और स्नातक = 17892 रुपये मिलना चाहिये। जबकि सरकार द्वारा तय किया गया न्यूनतम वेतन – अकुषल = 7722 रुपये, अर्ध-कुषल/आठवीं पास = 8528 रुपये, कुषल/दसवीं पास = 9386 रुपये, कुषल और स्नातक = 10218 रुपये है। एक अकुशल मजदूर को एक माह में अपने खर्च के लिये 43 प्रतिशत कम वेतन मिलता है।

अभियान के दौरान लोक राज संगठन के दिल्ली सचिव ने भी अपने वक्तव्य में बताया कि जो वेतन आज मजदूरों को दिया जाता है वह सरकार और श्रम विभाग दोनों को पता है। कांग्रेस पार्टी और भाजपा के साथ-साथ किसी भी पार्टी के चुनाव के घोषणा पत्र में मजदूरों के न्यूनतम वेतन की बात को नहीं उठाया जाता है। जब इन नेताओं को अपनी तनख्वाह बढ़वानी होती है तो सब मिलकर संसद और विधान सभा में अपनी तनख्वाह बढ़वा लेते हैं। यहीं किसी फैक्ट्री में मजदूर मर जाता है तो उस मालिक को सिर्फ 500 रुपये का जुर्माना होता है। लखानी फैक्ट्री में जल कर कई मजदूर मर गये, बांग्लादेश में एक गारमेंट फैक्ट्री में सैकड़ों मजदूर दब कर मर गये, और कराची में जूते की फैक्टरी में मजदूर मारे गये। लेकिन उन सभी मालिकों को सिर्फ 500 का ही जुर्माना हुआ होगा। उन्होंने बताया कि हिन्दोस्तान में बड़े-बड़े सिर्फ 100 घराने हैं जो देश में राज करते हैं। 1990 में हिन्दोस्तान की अर्थव्यवस्था 20वें नम्बर पर थी और आज मजदूरों और किसानों की मेहनत से यह चैथे नम्बर पर आ गयी है। इन बीते सालों में पूंजीपतियों की दौलत 32 गुना बढ़ गयी है लेकिन मजदूरों और किसानों की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती गयी है। उन्होंने कहा कि हिन्दोस्तान में अफ्रीका से ज्यादा गरीबी है लेकिन ब्रिटेन के अमीरों से ज्यादा अमीर हैं।

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उन्होंने ने कहा कि आने वाले विधान चुनाव में मजदूर संगठन तथा ट्रेड  यूनियनें अपने उम्मीदवार को खड़े करें और उनको जितायें, जो जीतने के बाद विधान सभा में मजदूर के लिये श्रम कानून और न्यूनतम वेतन की बात को उठायेगा। मजदूरों को राजनीति में उतरना होगा और मजदूरों के हित के लिये राजनीति करनी होगी, तभी हम देश में लोक राज लेकर आ सकते हैं और सभी की खुशहाली सुनिश्चित कर सकते हैं।

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