महिलाओं पर हिंसा करने वालों को सज़ा होनी ही चाहिये!  

अपनी सुरक्षा के लिये पड़ोस व मोहल्लों में समितियां बनाओ!

पिछले चार से पांच दिनों में एकदम शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वाले लाखों लोगों पर पुलिस द्वारा हमलों की कड़ी निंदा की जानी चाहिये! महिला-पुरुष, नौजवान प्रदर्शनकारी, जो एक नवयुवति पर अपराधी हमले और बलात्कार से बहुत गुस्से में हैं, वे अपने घरों से निकल कर अपना आक्रोश व्यक्त करने और अपनी जायज मांगों को रखने के लिये निकले तो उन्हें पुलिस की नाराजगी का सामना करना पड़ा। उन पर पुलिस की पानी की तोपों और लाठियों की बरसात सहनी पड़ी। राज करने वाले कुलीन उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने का अधिकार भी नहीं देना चाहते हैं। पिछले 24 घंटों में असमाजिक तत्वों को वहां लाया गया है जिन्होंने अनुशासनहीन और हिंसात्मक बर्ताव से शांतिपूर्वक प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने और उन पर पुलिस द्वारा हमले की सफाई देने का काम किया है। अब मीडिया गुहार लगा रहा है कि प्रदर्शनकारी “शांतिपूर्ण तरीके से वापस“ अपने घर जायें! इन समाजविरोधी तत्वों के लिये वही सत्ताधारी जिम्मेदार हैं क्योंकि वे ऐसे अपराधी गुंडों का इस्तेमाल, अपने मकसद के लिये दंगे फसाद कराने, साम्प्रदायिक कत्लेआम कराने, महिलाओं पर हमले कराने तथा समाज में नाइंसाफी के विरोध करने वाले किसी भी दूसरे तबकों के खिलाफ़ करते हैं।

हम सामूहिक बलात्कार के जघन्य अपराध की कड़ी निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाये। इस अपराध के लिये तथा महिलाओं पर अनगिनत दूसरे अपराधों के लिये, जो सामने भी नहीं आते हैं, उनके लिये हम केन्द्र और दिल्ली में राजसत्ता में बैठी सरकारों, पुलिस और “न्याय व्यवस्था“ को जिम्मेदार ठहराते हैं। शहर के अस्पताल में जिन्दगी के लिये संघर्ष कर रही पीडि़त महिला, उन सभी को बलपूर्वक तरीके से चिह्नित करती है, जो महिलाओं के खिलाफ़ बढ़ती हिंसा से क्रोधित होकर अन्दर ही अन्दर खौल रहे हैं। दिल्ली व अन्य शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर कर यही मांग कर रहे हैं कि यह व्यवस्था को सुनिश्चित करना चाहिये कि हर हालत में महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी होनी चाहिये।

आज की परिस्थिति के लिये कौन जिम्मेदार है? महिलाओं की सुरक्षा के लिये, और उनपर हमला करने वाले अपराधियों को सजा दिलाने के लिये कानूनों की कोई कमी नहीं है। परन्तु राजनीतिक ठग, जो अपने देश की सत्ता में बैठे हैं, वे कानूनों को लागू नहीं करना चाहते हैं। सबसे बड़ी दो राजनीतिक पार्टियां, कांग्रेस पार्टी और भाजपा, खुद ही महिलाओं के खिलाफ़ सबसे जघन्य अपराधों के दोषी हैं। इन पार्टियों के बहुत से नेता खुद महिलाओं के बलात्कार व अपहरण के दोषी हैं। इन्हीं पार्टियों के नेताओं ने 1984 के सिखों के नरसंहार के हत्यारे गुंडों का नेतृत्व किया था। उन्होंने ही 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के पश्चात मुंबई, सूरत व अन्य शहरों में, और 2002 में गुजरात में, मुसलमानों पर हमले करने वाले गुंडों को उत्तेजित किया था। महिलाओं का बलात्कार किया गया था और उनके पेट काट कर जन्म होने के पहले ही बच्चों के टुकड़े-टुकड़े कर दिये गये थे। सत्ता में बैठे यही अपराधी हैं जो कश्मीर, पुर्वोत्तर व तथाकथित आतंकवादियों के भरे छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा व अन्य प्रांतों में, सैनिकों को  महिलाओं पर बलात्कार और ज़्यादतियां करने की छूट देते हैं। मंत्रियों, अफसरों, कचहरियों व सुरक्षा बलों की मिलीभगत व समर्थन के बिना ऐसे नरसंहार व कत्लेआम होने असंभव हैं। अतः वे किस मुंह से लोगों के सामने आकर एक बार और कह सकते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा उनके हाथों में छोड़ देनी चाहिये?

जबकि हम मांग करते हैं कि अपराधियों को सजा होनी चाहिये, हम हमारी मांगों की पूर्ति के लिये पुलिस व सत्ताधारियों पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। चलो हम संगठित होकर अपने पड़ोस में समितियां बनायें, जो पार्टियों की सदस्यता, जात, धर्म व लिंग भेद से परे हों ताकि हम अपने बचाव का बंदोबस्त स्वयं कर सकें। उसी वक्त, हमें महिलाओं व समस्त समाज के खिलाफ़ हिंसा की रोकथाम के चिरस्थायी समाधान के लिये संघर्ष करना होगा ताकि सबकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

लोक राज संगठन, हिन्द नौजवान एकता सभा व पुरोगामी महिला संगठन द्वारा 23 दिसम्बर 2012 को जारी संपर्क:- ई-392, संजय कालोनी, ओखला फेस-2, नई दिल्ली 110020, फोन – 9868721375

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