final_photo.jpg17 फरवरी, 2012 को हरियाणा प्रदेश के जिला फतेहाबाद में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिये जबरदस्ती भूमि अधिग्रहण किये जाने के विरोध में जिला मुख्यालय के सामने अलग-अलग गांवों के लोग अपना विरोध प्रदर्शन के लिये इकट्टे हुये।

किसान संघर्ष समिति गोरखपुर की अगुवाई में यह धरना 567 वें दिन में प्रवेश कर गया है। सरकार की जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ़ गांवों से आये हुये लोगों ने विरोध प्रकट किया।

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लोक राज संगठन के हरियाणा राज्य के अध्यक्ष का. दुनी चंद ने स्पष्ट किया कि वर्तमान नीतियां मजदूर-किसान विरोधी हैं। हमें मिलकर इन नीतियों के खिलाफ़ डटकर मुकाबला करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि हम जमीन अधिग्रहण के अंग्रेजों के कानून के खिलाफ़ हैं, जो देश के किसानों की रोजी-रोटी छीनती है। इस कानून के तहत, सिर्फ कुछ मुट्टीभर पूंजीपतियों के हितों के लिये बहुसंख्यक किसानों की रोजी-रोटी को दाव पर लगायी जाती रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा यह भी होना चाहिये कि हमें आम लोगों को सत्ता में कैसे लाएं ताकि इस लुटेरी व्यवस्था को जड़ से खत्म कर सकें। और उसकी जगह ऐसी व्यवस्था की स्थापना की जाये जिसमें मजदूर और किसान अपनी मेहनत का फल पायें। हर एक इंसान जो मेहनत करके समाज में योगदान देता है, उसकी रोजी-रोटी, आवास, खाद्य का अधिकार मूल अधिकार को सुनिश्चित करता हो।

जबरन जमीन अधिग्रहण के खिलाफ़ आंदोलन को समर्थन देने के लिये दक्षिणी भारत से आये जस्टिस कौशल पाटिल, जो किसान-मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ़ लम्बे समय से संघर्ष कर रहे हैं, ने धरने को संबोधित किया।

इसके अलावा, धरने को हिमाचल प्रदेश से आये गुभान भाई तथा दिल्ली से आये डा. विष्णु प्रकाश ने संबोधित किया।

गांव गोरखपुर के का. किशन स्वरूप और किसान संघर्ष समिति गोरखपुर के प्रधान का. हंसराज सिवाच ने समापन भाषण रखा।

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