नागरिकों, अपनी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं खुशहाली को सुनिश्चित करने के लिए एकजूट हो ! लोक राज संघटन की कल्याण समित का आवाहन, 12 जून 2016

Submitted by admin on Thu, 2016-06-16 11:52

क्या आपको मालूम है कि आपके पड़ोसी इलाके में कितनी बड़ी दुर्घटना हुई जब 26 मई 2016 को सुबह करीब 11.45 बजे डोम्बीवली एम आय डी सी स्थित प्रोबेस एंटरप्रायजेस की फैक्ट्री में एक बहुत  बड़ा विस्फोट हुआ? वह इतना जबरदस्त था कि दो मजदूरों के शव बगल के अहाते में फेंके गए. अधिकृत कहानी के मुताबिक उस विस्फोट में 12 लोग मर गए तथा 100 से ज्यादा घायल हुए. मगर नागरिकों के मुताबिक असलियत इस से बेहद ज्यादा बुरी है. उनका कहना है कि बगल के स्कूल में स्कूल मेंटेनन्स का काम करनेवाले 20 मजदूर भी मारे गए हैं. बगल से ही 42 वर्ष उम्र का एक ऑटो रिक्शा ड्राईवर जा रहा था वह धमाका सुनकर दिल के दौरे से मर गया. जब विस्फोट हुआ तब अगर स्कूल शुरू होता तो  छोटे बच्चों सहित हजारों मर जाते !

  • विस्फोट के बाद बेहद भयानक आग फ़ैल गई जिससे एम आय डी सी की बगल की 4 फैक्टरियों को भारी नुकसान हुआ. 2 किलोमीटर तक की दूरी तक करीब 3000 घर, दफ्तर एवं दूकानों की हानि हुई एवं हजारों लोग बेघर हो गए.
  • कई घरों में दरवाजे उखड गए, एवं टी वी , काँच का सामान, खिडकियों में लगी काँच, गाड़ियों की काँच, यहाँ तक कि लोगों के चश्मे के काँच भी उस धमाके से फूट गए. यहाँ तक कि विस्फोट के धमाके के कारण कुछ खिडकियों की लोहे की सलाखें  भी मुड़ गयीं. काँच के टुकड़ों से  दर्जनों लोग घायल हो गए हैं.
  • विस्फोट के उपरांत जो गैस फ़ैल गई, उससे उस इलाके के नागरिकों को साँस की तकलीफ होने लगी. मगर फिर भी अबतक सरकार की तरफ से यह स्पष्टीकरण नहीं दिया गया की उस विस्फोट में कौन से रसायन थे.
  • विस्फोट से बगल की कई इमारतें इस तरह हिली कि लोगों को लगा कि शायद भूचाल आया है. जिनके घरों का नुकसान हुआ है उन्हें अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है.
  • महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण निगम ने यह कह कर जिम्मेदारी झटक दी है कि “यह मसला औद्योगिक सुरक्षा तथा स्वास्थ्य विभाग से संबंधित है.”
  • महाराष्ट्र लेबर डिपार्टमेंट के औद्योगिक सुरक्षा विभाग ने जो बयान दिया वह तो और भी ज्यादा सनसनीखेज था. “हम अलग अलग रासायनिक फैक्ट्रयां हमेशा चेक करते ही हैं. हमने यह फैक्ट्री भी चेक की थी. डोम्बिवली की दूसरी फैक्टरियों का चेकिंग भी हम करेंगे.” ऐसा उनका बयान था.
  • अगर वाकई उस फैक्ट्री का चेकिंग हुआ था तो फिर उसे इतनी खतरनाक हालात में चलने की इजाजत क्यों दी गई ? ठाणे जिले में 14 एम् आई डी सी हैं जिनके लिए केवल 12 इंस्पेक्टर हैं . डोम्बीवली की करीब 500 फैक्ट्रीयों के लिए केवल एक इंस्पेक्टर है !
  • नियमों के अनुसार अगर देखा जाये तो ट्रांस ठाणे क्रीक के औद्योगिक क्षेत्र में  किसी भी रासायनिक फैक्ट्री के कम से कम 1 किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह की निवासी परियोजना को अनुमति नहीं देनी चाहिये. मगर एम आय डी सी में निवासी परियोजना ही नहीं बल्कि बगल में ही एक स्कूल बनाने की भी अनुमति दी गई है ! इस नियम का उल्लंघन करने की जिम्मेदारी एम आय डी सी तथा महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण निगम की है. नागरिक सुरक्षित माहौल में काम कर सके एवं रह सके, इस तरह औद्योगिक एवं निवासी क्षेत्र का नियोजन करने की जिम्मेदारी को सरकार ने नजरअंदाज किया है.
  • औद्योगिक एवं निवासी क्षेत्र के बीच बफ़र झोन सुनिश्चित करना तो दूर, औद्योगिक निगमों के अंदर बुनियादी सुरक्षा नियमों पर अमल नहीं किया जाता है  , और सरकार भी उद्योगों पर निर्बंध नहीं लगाती है.
  • 2009 में केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने, डोम्बिवली एम आय डी सी को एक बड़े पैमाने पर प्रदूषित इलाका घोषित किया था. मगर उसके बावजूद प्रदूषण कम करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए. स्थानिक नागरिक कई वर्षों  से यह शिकायत कर रहे है कि वहाँ के रासायनिक कारखानों से गंदी बू फ़ैलाने वाले गैसें छोड़े जाते हैं. डोम्बिवली ( पूर्व ) स्थित  एम आय डी सी फेज 1 और एम आय डी सी फेज 2 में करीब 500 कंपनिया हैं जिनमे से करीब 250 रसायनों से संबधित उत्पादन करते है. उनमे से कईयों में काफी खतरनाक रसायनों पर प्रक्रिया होती है. ज्यादातर कंपनिया प्रदूषण नियंत्रण नियमों का उल्लंघन करके उस इलाके में प्रदूषण फैलाती हैं.
  • उनमे से एक रासायनिक फैक्ट्री के एक मजदूर ने कहा, “ फैक्ट्रीयों से रात को गैसें छोड़े जाते है. निवासी कालोनी के अंदर से जो नाला बहता है उसी में फैक्ट्रीयां प्रदूषित पानी खुलेआम छोड़ते हैं. अगर उनके खिलाफ कोई शिकायत की तो उसका मतलब हमें नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा.”
  • सरकार के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने  2013  में ही राज्य के प्रदूषण नियंत्रण निगम को निर्देश दिया था, कि डोम्बीवली के औद्योगिक इलाके की जो फैक्ट्रीयां उल्हास नदी को प्रदूषित करती हैं और लोगों के स्वास्थ्य को हानि पहुँचाती हैं,  उन्हें बंद किया जाए. डोम्बीवली में प्रदूषण इस हद तक बढ़ गया है कि वहाँ 2014 में  “हरी बारिश” हुई थी.
  • डोम्बीवली के 16 लाख नागरिक एवं एम आय डी सी में काम करनेवाले 2 लाख लोग मानो  एक रासायनिक टाइम बम पर बैठे हैं! प्रदूषण में डोम्बीवली महाराष्ट्र में दूसरे तथा देश में 14 वे स्थान पर है .
  • विशुद्धीकरण किए बगैर प्रदूषित पानी नजदीक के पानी के स्त्रोतों में तथा नदियों में छोड़ा जाता है. इससे भूजल भी प्रदूषित हुआ है. प्रदूषित हवा की वजह से नागरिकों को साँस लेने से  जुड़ी हुई समस्यायों  का सामना करना  पड़ता  है. यह समस्या इतनी व्यापक है कि कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पूरे ठाणे जिले में जितना खाँसी का सिरप बेचा जाता है उसमें से 70 प्रतिशत केवल डोम्बीवली में बिकता है.
  • नागरिक कई वर्षो से प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. आर टी आय के जरिये उन्होंने प्रदूषण के बारे में मालूमात हासिल करने की कोशिश की है और प्रदूषण के खिलाफ कई शिकायते भी दर्ज की हैं. कई अधिकारीयों से वे मिले हैं मगर सभी कोशिशे नाकामयाब हुई हैं.
  • कई फैक्ट्रीयां खतरनाक तरीके से अब भी चल रही  हैं . मालिकों को तो केवल ज्यादा से ज्यादा मुनाफे कमाने में रूची है और इसीलिए सुरक्षा के लिए, दुर्घटना टालने के लिए  एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए वे पैसा खर्च नहीं करते. सरकारी अधिकारी यह सब नजरअंदाज करते हैं.

अपने देश में इस तरह की यह पहली दुर्घटना नहीं है. डोम्बीवली में ही योग्य सुरक्षा क़दमों को नज़रअंदाज करने की  वजह से अनेक घटनायें घटी हैं. यह तो सभी को मालूम है कि फेक्ट्री मालिक ना तो कामगारों की जान की परवाह करते हैं और ना ही पड़ोसी नागरिकों की जान की. वे तो अधिक से अधिक मुनाफ़ा निचोड़ना चाहते हैं.

सरकारी अधिकारीयों की यह जिम्मेदारी है कि वोह सुनिश्चित करें कि सुरक्षा से सम्बंधित सभी क़दमों का पालन किया जाए. लेकिन, यह साफ दिखता है कि वे अपना काम नहीं करते हैं. इतने लोगों की मौत के लिए किसी भी अधिकारी को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाता है.       

इस दुर्घटना ने फिर एक बार दिखा दिया है कि हम पर असर करनेवाले किसी भी मामले के बारे में निर्णय लेने का हमें कोई अधिकार नहीं है. यह स्पष्ट है कि हमारी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए एकजूट होकर कृती करना आवश्यक है. यह भी जाहिर है कि केवल हमारी एकता हमारा सबलीकरण कर सकती है. यह घटना लोगों के सबलीकरण, यानि लोक राज की आवश्यकता पर फिर से ज़ोर डालती है. अपने लोगों के हाथों में सब तरफा सत्ता सौंपने के उद्येश्य के लिए लोक राज संगठन समर्पित है. इस कार्य में हमारे साथ जुड़ जाने का हम आपको आवाहन करते हैं!

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