लड़ेंगे तो जीतेंगे!

Submitted by admin on Sun, 2016-09-25 23:08

दक्षिण दिल्ली के ओखला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित संजय कालोनी के स्थानीय निवासी अपने इलाके की लोक राज समिति की अगुवाई में सार्वजनिक शौचालय के रख-रखाव में लापरवाही, दरवाजे-नलके टूटने तथा गैर-सामाजिक तत्वों के अड्डा जमाने के खिलाफ़ निरंतर संघर्ष करते आ रहे हैं।

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सार्वजनिक शौचालय को लेकर समिति के प्रतिनिधिमंडल 30 जून, 2016 को  ‘दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड’ के मुख्य अभियंता से मिला। उन्हें लिखित शिकायत दी। परंतु विभाग द्वारा कोई ठोस कार्यवाही न होने पर समिति ने पुनः 7 सितंबर, 2016 को दिल्ली के मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत की गई। अंततः लोक राज समिति के लगातार संघर्ष के चलते शौचालय की उपरोक्त समस्याओं को हल करने के लिए ‘दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड’ को बाध्य होना पड़ा।

गौरतलब है कि 2005 से जीर्णवस्था में बंद पड़े शौचालय को समिति ने 11 वर्ष के लंबे व अथक संघर्ष की वजह से 2015 में इसे बनाया गया था। लोक राज समिति को शौच व्यवस्था के बुनियादी अधिकार के लिए, जनता द्वारा तथाकथित चुने गये निगम पार्षद, विधायक, सांसद, दिल्ली की सत्ता पर विराजमान राजनीतिक पार्टियों से गुहार लगानी पड़ी और ठोस कदम न लेने के खिलाफ़ सैकड़ों बार सड़कों पर उतर कर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ा। समिति के निडर व निरंतर संघर्ष की वजह से दिल्ली सरकार इस मांग के सामने झुकी।

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हमारा अनुभव दिखाता है कि लोगों को अपने हालात बदलने के लिए खुद संगठित होकर संघर्ष करना होगा और लोक राज समितियों का निर्माण तथा उन्हें मजबूत करना होगा। लोगों को एक ऐसी व्यवस्था की स्थापना के लिए संघर्ष करना होगा, जहां चुनने और चुने जाने का अधिकार लोगांे के हाथों में हो, जहां जनता के अनुसार काम न करने वाले जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार और अपने अधिकारों को सुनिश्चित करने वाले कानून प्रस्ताव करने का अधिकार लोगों के हाथों में हो।

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आओ, हम लोक राज समिति के अधिकारों के संघर्ष को मजबूत करें और इस पवित्र काम में अपनी भूमिका अदा करे।

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